Posted by: Rajesh Shukla | September 7, 2015

The End of Masculine theology

निरस्तकुहकं सत्यं परम धीमही !

The issue that I had taken forward in my previous post is being thought in the context of masculine metaphysics, epistemology and sexuality.  I would contemplate on the Puranik Raas Leela that Hindu King-God had performed with few selected cowherd women or Gopis on a full moon night in the deep forests near Vrindavana of Vraja.  But before entering in to it, let’s read what Veda Vyasa had promised us?

“निगमकल्पत्रोर्गालितं फलं शुकमुखादमृतद्रवसंयुक्तं !
पिबत भागवतं रसमालययं मुहुरहो रसिका भुवि भावुकाः!!“

This verse is written in the beginning of Purana, in it he had promised us to deliver a text full of rasa which is literally translated as pleasure and strictly philosophically as aesthetic pleasure or bliss. Secondly, the pleasure of the text does not come from the outside; it is obtained from the fruit that grows upon the tree called “Nigam-kalptaru” i.e. from a tradition of texts. pt313 Read More…

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Posted by: Rajesh Shukla | April 26, 2015

ऋतं च सत्यं च

light-health

असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय –कठोपनिषद

जब किसी देश का आन्तरिक सामंजस्य बिगड़ता है अर्थात जब उस देश का भर्ग प्रकाश विरहित हो जाता है तब उस देश का विनाश हो जाता है, ऐसा दूरदृष्टि संपन्न ज्ञानियों का मानना है ! उस देश की जनता विकट संकटों में फंसती चली जाती है और उसका समाधान न तो अज्ञानता में बुरी तरह फंसा हुआ लालची पूजारी और बाबा कर सकता है और न ही वह अर्थ व्यवस्था जिसका आधार कर्ज है!  ऋण और व्याज आधारित एक दलाल अर्थव्यवस्था किसी भी तरह देश की जनता का भला नहीं कर सकती है ! यदि हम देखें तो व्याज शब्द का अर्थ होता है भाण, कपट, छल और यह दलाल अर्थव्यवस्था मूलभूत रूप से  इसी चीज की प्रसारक है ! भारत देश के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कपट और छल को जनता उस समय तो नहीं समझ पायी जब कार्पोरेट चैनलों नें कपट और छल का सहारा लेकर जनता को भ्रमित किया लेकिन अब एक साल बाद इस कपटी ,झूठा और ठोंगी नेता को जनता कमोवेश पहचान गयी है ! अनृत बहुत लम्बे समय तक नहीं टिकता, यह अनुभव से हम जानते हैं! अनृत में ऋत नहीं होता इसलिए यह स्पंदन करने में सक्षम नहीं! जब अंगेजी में हम इसे फार्ट कहते हैं तो उसका तात्पर्य यही होता है! खैर, चलिए इस पोस्ट को थोड़ा और अलग भारतीय ठंग से  लिखते हैं! इसको आध्यात्म से भी जोड़ते हैं लेकिन थोड़ा आधुनिक रूप में ! Read More…

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