Posted by: Rajesh Shukla | April 23, 2015

दलाल अर्थव्यवस्था के दौर में एक किसान की आत्महत्या


suicide_farmer_759editकेंद्र में नरेन्द्र मोदी सरकार के एक साल पूरा हो गया लेकिन जनता के प्रति भयंकर चुनावी सभाओं में दिए गए तमाम वायदों में एक भी वायदा पूरा हुआ नहीं दिखता है ! नरेंद्र मोदी ने चुनाव में भारत के किसानों से वायदा किया था सत्ता में आने के बाद उनकी सरकार फसलों की वीमा करेगी और उनके नुकसान का आधा मुआवजा देगी,यदि आपको याद हो! उन्होंने वादा किया था कि प्रधानमंत्री बनते ही देश की गरीब जनता के खाते में डेढ़ लाख रुपया आ जाएगा, यदि आपको याद हो? वह कालाधन सरकार का खाता में नहीं आया और न ही जनता को कोई धन मिला ! फिर झूठ के महानायक मिस्टर मोदी ने जनता को धनवान बनाने के लिए जनधन योजना के तहत “शून्य बैलेंस” अकाउंट खोलवाने का संकल्प लिया और देश के सभी बैंकों को इसे एक निश्चित अवधि में खोलनें का आदेश दिया गया जिसके अन्तरगत ८ करोड़ खाता खुला ! हरेक खाते पर बैंकों का कमोवेश 2.५० रूपये खर्च हुए , श्रम और समय अलग जाया हुआ! जनता को हासिल क्या हुआ? शून्य ! खाता खुलने को साल होने को आया है लेकिन मोदी सरकार नें अब तक उसमें एक रुपया भी नहीं दिया है ! ठगी का इससे बड़ा कोई दूसरा उदाहरण और क्या हो सकता है? इससे पहले कि जनता इस सदमें से उबरती, पापी सरकार से क्रुद्ध प्रकृति नें किसानों पर कहर बरपा दिया! देश के किसानों की 80 प्रतिशत फसल बर्बाद हो गयी ! सरकार खामोश होकर बर्बादी का नजारा देखती रही और किसान की आत्महत्याओं का ऐसा दौर शुरू हुआ जैसा पहले कभी नहीं देखा गया! सरकार नें जनधन योजना के खातों में फौरी समाधान और रिलीफ के बतौर यदि कुछएक हजार की  भी घोषणा किया होता तो शायद किसानों की आत्महत्या रुक गयी होती! या कमसे उतनी संख्या में किसान आत्महत्या नहीं करते!images

इस राष्ट्रीय मुद्दे को हिंदुत्व शक्तियो नें दिल्ली में एक दूसरा ही रंग दे डाला जिसमें उनका देश की गरीब  जनता के प्रति षड्यंत्र एक बार फिर उजागर हुआ है ! दिल्ली की आप पार्टी द्वारा आयोजित रैली में राजस्थान से पधारे किसान पुत्र गजेन्द्र जी ने जब पेड़ पर अपनी पगड़ी का फंदा बनाकर सबकी आँखों के सामने ही झूल कर आत्महत्या कर लिया तो लगा कि सच में कुछ देश को हिल्ला देने वाली ऐतिहासिक परिघटना घटित हुई है ! दिल्ली में हाहाकार मच गया और इलेक्ट्रोनिक मीडिया नें जो हाहाकार मचाया उससे देश तो हिलने ही लगा ! लेकिन गजेंदर जी नें आत्महत्या के लिए  अपने कृषि प्रधान राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का आवास या किसानों की आत्महत्याओं के लिए दोषी देश का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ऑफिस या देश की संसद को न चुनकर दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल की रैली को क्यों चुना? यह एक प्रश्न है जिसका उत्तर मैं खोज रहा हूँ !

आखिरकार कमोवेश नपुंसक केजरीवाल सरकार जो दिल्ली की जनता को पानी तक मुहैय्या नहीं करवा सकती है उससे यह राजस्थान से आया कास्तकार किस तरह की उम्मीद लगाये बैठा था? किसानों के लिये तो दिल्ली की शहरी अर्थव्यवस्था का बजट में कभी कोई जिक्र भी शायद ही होता है, फिर सवाल यह उठता है कि यह दूर देश से आया किसान केजरीवाल के सामने किस बात के लिए आत्मह्त्या करेगा? राजस्थान से आया यह फैशनेबल पगड़ी बांधनें वाला किसान कहीं यह तो नहीं मानता था कि देश के किसानों की आत्महत्याओं की जिम्मेदार केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार न होकर दिल्ली की केजरीवाल सरकार है !! कहीं ऐसा तो नहीं यह कोई मोदी भक्त था और मोदी सरकार पर आप नेताओं द्वारा किये जा रहे आक्रमण को बर्दास्त नहीं कर पाया और उसने आत्म हत्या कर लिया?? विश्लेषणकर्ताओं को इस आत्महत्या में यह एंगल भी तो देखना चाहिए था! हलांकि आत्मह्त्या के ठंग से यह तो स्पष्ट है कि यह आत्महत्या सोच समझकर और बहुत प्लान करके किया गया था ! इस आत्महत्या में एक फासिस्ट षड्यंत्र की बू तो आ ही रही है ! किसानों के प्रति की गई इस राजनैतिक साजिश में ओनस नरेंद्र मोदी पर उनकी सरकार पर ही है जो जनविरोधी नीतियों और सोच के कारण लागातार अपनी क्रेडिबिलिटी खोती जा रही हैं !

 

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