Posted by: Rajesh Shukla | August 21, 2014

गोकुल अर्थात गोवंश


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महाभागवत के अनुसार धर्म का इस पृथ्वी लोक पर गौमाता ही एक मात्र विग्रह हैं |आज हमारे देश में धर्म सच जीवित है या नहीं है इसका अनुमान यहां  की गायों की दशा को देख कर लगाया जा सकता है। भारत के तीनों महान धर्म हिंदू धर्म, जैन धर्म और बौध धर्म ने गोमाता को ही धर्म का विग्रह माना है। इस महान धर्मप्रवण देश में गौमाता की दुर्दशा निःसंदेह शर्म की बात है। हिन्दू समाज को यह  समझना चाहिए कि भगवान श्री कृष्ण के  जन्म का एक उद्देश्य गऊ रक्षा भी था । इसलिये भगवान ने अपनी लीलाभूमि ब्रज के गोकुल को चुना, उनका पालन पोषण गोकुल  में हुआ और जिस कुल में उनका पालन  हुआ वह कुल भी गायों की रक्षा में तत्पर था । पूरा  गाँव ही गोकुल का था अर्थात गोवंश का था और  गोप वे थे जिनके ऊपर गोकुल की गायों की रक्षा का  उत्तरदायित्व था। गाय का भगवान ने जीवन में कितना अधिक महत्व दिया है इस बात का अनुमान भागवत के इस प्रसंग से लगाया जा सकता है– कथा के अनुसार पूतना बध के पश्चात् यशोदा और रोहिणी बाल श्री कृष्ण की अशुभ दृष्टि से   रक्षा के लिये उन्हें गाय के पूँछ से अइछती हैं, गोमूत्र से स्नान कराती हैं और फिर  पुरे शरीर पर गो-रज लगाती हैं !

यशोदा रोहिणीभ्याम् ताः समं बालस्य सर्वतः ।
रक्षाम विदधीरे सम्यकगोपुक्छ भ्रमणादिभिः ।।
गोमूत्रेण स्नापयित्वा पुनर्गोरज सारभकम्  ॥ -भागवतम्  स्कंध १०-२२ -२०

भारतीय जीवन में गाय का स्थान सबसे ऊपर रहा है। भगवान ने गोकुल वासियों को कहा कि इंद्र की पूजा करने से बेहतर है गाय की पूजा करें। आज हमें अपने जीवन में गाय को स्थान देंने की जरुरत है।
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आर्थिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से गाय इस देश की जरूरत है। वैश्य समाज के ऊपर केवल व्यापार वृद्धि का ही उत्तरदायित्व नहीं है, यदि भागवत की ही बात मानें तो उनका एक बड़ा उत्तरदायित्व गो-रक्षा भी है।

कृषिवाणिज्यगोरक्षा कुसीदं तूर्यमुच्यते  ।
वार्ताचतुर्विधा तत्र वयं गोवृत्तयोनिशम् ॥ – भागवत, स्कंध १०-२५ -२१

वर्तमान भाजपा सरकार नें गोरक्षा और संबर्धन के लिए जो कदम उठाये हैं वह प्रशंसनीय है लेकिन यह एक धर्मिक दिखावा मात्र बन कर न रह जाये। इसके लिए सरकार गोरक्षा और संबर्धन को एक राष्ट्रीय आन्दोलन का रूप दे और किसानों को इस पूरी प्रक्रिया का हिस्सा बनाये। गाय ही किसानों की दरिद्रता का समाधान है।

–श्रीर्मस्तु

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