Posted by: Rajesh Shukla | July 4, 2014

मनुष्यो में अधम ही वासुदेव की पूजा न कर पीर-साईं की पूजा करते हैं


images
<यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत, अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानम सृज्याहम>

श्रीकृष्ण ने भगवदगीता में क्या कहा है “न मां दुष्कृतिनो मूढाः प्रपद्यन्ते नराधमाः” केवल मनुष्यों मे नीच,अधम,मूढ ही मुझ वासुदेव की पूजा न कर पीरसीर की पूजा करते है”। जिस धर्म और परम्परा की रक्षा के लिये द्वारका पीठ के शंकराचार्य श्री स्वरूपानन्द जी लड रहे है वह भगवान द्वारा स्थापित सनातन वैदिक परम्परा है! कृष्ण जी ने कहा था अर्जुन से “”एवं परम्परा प्राप्त मिमं” यह परमतत्व का ज्ञान जो मै दे रहा हूँ वह परम्परा से प्राप्त है। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द जी ने सनातनधर्म की रक्षा करने का जो वचन पीठ पर बैठते समय लिया था उसे निष्ठा से निभा रहे है| जो कोई भी ईश्वरीय सनातन हिन्दू धर्म की परम्परा के खिलाफ खडा होगा वह हिन्दू विद्वेषी करार दिया जायेगा!

शंकराचार्य श्री स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज को अविमुक्त क्षेत्र काशी जाकर विधि पूर्वक <पीर>पूजा बन्द करवाने का संकल्प लेना चाहिये। हरहर महादेव का घोष करते हुये हमे सनातन धर्म की रक्षा के लिया आगे आना चाहिए ! वास्तव में यह लड़ाई वैष्णवजन की पहले है क्योंकि इस पीर को कुछ दुष्ट हिंदू धर्म विद्रोहियों ने प्रारम्भ में विठोवा के खिलाफ खड़ा कर प्रचारित किया था । वास्तव में यह गंजेड़ी एक भिखारी था कोई फ़क़ीर नहीं था क्योकि फ़क़ीर होता तो अपनी ही इस्लामिक गुरु परम्परा का अतिक्रमण नहीं करता !

samadhi_sai_baba_shirdi
[above Mazar of Sai at Shiridi]
हमें पोस्ट नहीं लिखना है बस इतना कहना है कि जिस ज्ञान परम्परा और देवी देवताओं द्वारा हिंदू लोगो को इहलोक और परलोक में शांति प्राप्त होती है वह सनातन वैदिक परम्परा से है! जिस परम ज्ञान का वासुदेव श्री कृष्ण ने उपदेश किया उसका ही गायन प्राचीन काल में वैदिक ऋषियों नें किया था wt
जिन देवताओं की पूजा का प्रावधान वैष्णव, शैव , शाक्त, गाणपत्य और सौर्य पूजन परम्परा में है उनका ही पूजन हिंदू करता है किसी इर-पीर की पूजा इन पांच हिन्दू परम्पराओं नहीं है। साईं सनातन हिन्दू धर्म के खिलाफ एक षड़यंत्र है और इस षड़यंत्र में बहुत ज्यादा काले धन का प्रयोग किया गया है। इसके पीछे विदेशी शक्ति कार्यरत हैं।
ज्ञातव्य हो कि सनातन धर्म में  चारो आम्नायों  के देववर्ग निर्धारित हैं , आम्नाय  के अनुसार पश्चिम्नाय जिसमे महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान , मध्यप्रदेश का ज्यादातर हिस्सा और दिल्ली आती है उसके देवता श्री कृष्ण वासुदेव हैं। पश्चिम्नाय में सभी देवताओ की पूजा का प्रावधान उनके बाद ही किया गया है। देश सभी हिस्सों से वैष्णव समाज पीर पूजा का विरोध करे भाजपाई-संघी पीर-सीर की पूजा में विश्वास कर सकते हैं हिन्दू अपनी परम्परा में विश्वास करता है।

आज सुबह मैंने दो चार ट्वीट किये थे इस मुद्दे पर  यह पोस्ट उसी का विस्तार है !

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

Categories

%d bloggers like this: