Posted by: Rajesh Shukla | November 23, 2012

धन्यवाद का दिन-थैंक्स गीविंग डे पर टर्की बे टर्की


थैंक्स गीविंग डे प्रमुखता से अमेरिका था कनाडा में पारिवारिक एकजुटता का दिन के बतौर मनाया जाता है जिसमें परिवार के सदस्य जो कुछ बेहतर उन्हें जीवन में मिला है उसके लिये एक दूसरे को बधाई तथा धन्यवाद देते है। हर व्यक्ति का जीवन किसी न किसी अन्य व्यक्ति पर आश्रित है, यह जीवन परस्पर निर्भरता से ही चलता है। इस परस्परनिर्भरता के लिये ही यह धन्यवाद दिया जाता है। थैंक्स गीविंग डे पर ईश्वर को भी एक साथ मिलजुलकर धन्यवाद दिया जाता है कि ” हे ईश्वर आपको धन्यवाद है कि आपने मुझे इतना सुन्दर खुशियों भरा दिन दिया, कि हे ईश्वर आपने मुझे सिर पर छत दिया, यह पर्याप्त खाने पीने को  दिया, आपने मुझे यह परिवार दिया, हमे इतने मित्र दिये। हम मिलजुलकर आपको धन्यवाद देते हैं।” हलांकि यदि हम इसे ध्यान से देखे तो कुल मिलाकर यह दर दर खाने की तलाश में भटकने वाले कबिलाई समाज की प्रार्थना से ज्यादा नही लगती। इसमे ईश्वरीय तथा आध्यात्मिक-धार्मिक जैसा कुछ नहीं है, यह अपने स्वरूप में बहुत प्रिमिटिव है। थैंक्स गिविग डे अनेको पश्चिमी देशो में भी छिटपुट मनाया जाता है। अमेरीका में नवम्बर महीने का चौथा वृहस्पतिवार तथा अन्य जगह मसलन कनाडा में अक्टूबर का सोमवार को यह उत्सव मनाया जाता है। यह खानेपीने का उत्सव है जिसे परिवार में मिलजुल कर मनाया जाता है। परिवार एक दूसरे को दावत पर आमंत्रित करते है, जीवन मे मिली उपलब्धियो को एक दूसरे से साझा करते हैं तथा जीवन मे मिली खुशियों के लिये एक दूसरे को धन्यवाद देते है।

यह उत्सव भी धार्मिक स्वरूप रखताथा तथा प्रोटेस्टेन्ट रिफार्म से जुडा रहा है । नये इंग्लैण्ड में यह नयी फसल के आने पर मनाया जाता रहा है जोकि हेनरी-8 के समय में बहुत प्रभावी रूप मे सामने आया। वास्तव में अमेरिका तथा कनाडा में यह उत्सव ब्रिटेन तथा फ्रांस के लोगो द्वारा मनाया जाता था क्योकि यह मूलभूत रूप से यूरोपीय उपनिवेशवाद से जुडा रहा है। अमेरीकी इतिहास के अनुसार पहला थैक्स गिविंग डे पॉलीमाउथ मे मनाया गया था लेकिन उसका प्रचलन अमेरीकी क्रांन्ति के बाद टर्की पक्षी के साथ जुड गया। ब्रिटिश उपनिवेशवादी स्वामीभक्त टर्की को मेडागास्कर से लाकर आते थे और इसे खाने का प्रचलन उन्होने थैक्स गिविंग डे के मौके पर शुरू किया। सम्भवतः शुरूआती दौर में टर्की पक्षी को उपनिवेशवादी लूटेरो के सामने एक बूस्टर के रूप मे परोसा गया था शायद इसीलिये इसके साथ बूस्टरिज्म(बढावा देने) का विवाद भी जुड गया। मांसभक्षी उपनिवेशवादीयों की वर्कफोर्स के लिये यह निःसन्देह एक बूस्टर रहा होगा क्योकि यह शानदार पक्षी मेडागास्कर से लाया जाता था।  वर्तमान पूंजीवादी दौर में इसे बोनस कह सकते है जो कम्पनियां बाजार में सफलता के झंण्डे गाडने वाले मार्केटिंग मैन को देती है। उपनिवेशवादी दौर में बूस्टरिज्म कई तरह के थे जिसमे ब्रिटेन, फ्रांस तथा पूर्तगाल के महारानी-महाराजा की तरफ से पुरस्कार, उपाधियां, तथा कुछ विशेष तरह के बूस्टर प्रचलित थे जैसे उन देशो में ज्यादा सफल लूटेरे को जमीन जायदाद इत्यादि से नवांजा जाता था। अमेरिकी क्रांन्ति के बाद उपनिवेशवादी कनाडा इत्यादि में बस गये लेकिन पीछे छोड गये अपनी टर्की के साथ थैंक्स गिविंग डे मनाने की परम्परा जिसे नये वर्ग नें अपना लिया। आधुनिक समय का अमेरीकी थैंक्स गिविंग डे वास्तव में उपनिवेशवादी खान-पान का उत्सव है जिसे अब्राहम लिंकन के राष्ट्रपति बनने के बाद सरकारी उत्सव के रूप मे मनाया जाने लगा।

The First Thanksgiving at Plymouth America By Jennie A. Brownscombe (1914)

अब्राहम लिंकन ने सिविल वार के दौर में इसे राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जिससे कि दक्षिण और उत्तर अमेरिका एकीकृत रहें। बाद मे राष्ट्रपति रूजवेल्ट ने एक रिसोल्यूशन पारित कर थैक्स गिविग डे को राष्ट्रीय अवकाश का दिन घोषित किया।

थैंक्स गिविंग डे का इतिहास बहुत पुराना नही है, इतिहास के अनुसार युरोप में विशेषकर फ्रांस तथा ब्रिटेन में कैथलिक उत्सवो की बहुत भरमार थी जिसकी प्रतिक्रिया में इस उत्सव की शुरूआत पंद्रहवीं  सदी के शुरूआती दौर में हुई। 1536  तक चर्च के उत्सवो तथा छुट्टियों की सख्या  रविवार की  छुट्टी सहित कुल 117 थी बहुत थी सम्भवतः इसको कम करने के लिये भी इसका प्रचलन बढा। प्रोटेस्टेन्ट रिफार्म नें इसकी संख्या 27 तक समेट दिया और थैक्स गिविंग डे ने उत्सवों में एक प्रमुख स्थान ले लिया। जैसा कि पूंजीवाद के विकास से हम जानते हैं कि यह परिसीमन काम के घण्टो को बढाने के लिये किया गया था। प्रोटेस्टेन्ट ईसाई धर्म ही पाश्चात्य पूंजीवाद का वास्तविक धर्म रहा है क्योकि यह बाजार के अनुसार इसाई धर्म तथा जीवन को वदलने की अनुमति देता रहा है। अमेरीकी सन्दर्भ में थैंक्सगिविंग डे वास्तव में  पूंजीवादी बाजारू यात्रिक जीवन के बाद फिस्टिंग या एक तरह के साबाथ से ज्यादा नही है। यह फिस्टिंग  हिन्दुओ की तरह सात्विक पुऐ तथा पकवानो की फिस्टिंग नहीं हैं बल्कि एक खूनी दावत है जिसमे हर सेकेण्ड एक टर्की की जान जाती है। यह बहुत पाशविक है। अमेरिका मे इस वर्ष कल ही थैंक्स गिविग डे पर अरबों टर्की मार मार कर  खाया गया और ईश्वर को धन्यवाद दिया गया। शायद बकरीद पर भी इतने प्राणी नहीं मारे जाते हैं। ईश्वर को धन्यवाद देने का यह तरीका बेहद दूर्भाग्यपूर्ण है।

यह हॉली-डे कमोवेश शैतानों तथा चुडैलों के साबाथ का दिन की तरह है जिसमे मदिरा और रक्त पीकर चुडैले साबात के ईश्वर को धन्यवाद देती है और मानवों का खून पीने के लिये साबाथ के ईश्वर से और भी शक्ति की मांग करती हैं। शैतानियत ईसायत में बहुत गहरे अनुप्रविष्ट है। इस पर बहुत गहराई से विचार विमर्श करने की जरूरत है।  ईश्वर को केवल सात्विक मनोभाव से ही प्रसन्न किया जा सकता है जैसा कि भगवदगीता कहती है “तामसाः अधः गच्छन्ति ” तामसिक लोग अधोगामी होते है। अमेरीकी तामसिकता का ही यह प्रभाव है कि अमेरिका गुदा या एनस केन्द्रित हो गया है। अमेरीकी की कुल जनसंख्या का 3.8%  टट्टी-ट्यूब में निवास करने वाले गुदावादी है। अमेरिका पाशविकता की तरफ द्रुत गति से भाग रहा है और इसलिये मानवता इससे बेहतर की कोई आशा नहीं कर सकती है। यदि टर्की खाते खाते टर्की पर बम गिरा दें तो कहना मुश्किल है। एक गुदावादी फेसबुक पर मिला तो पता चला कि हिन्दू धर्म के शंकर भगवान से प्रभावित है और चैट पर लिखता था “bol bomb”। मैने उसे कहा कि यह बम नही है यह bum है जो जल तत्व का प्रतीक है। तब वह सोच में पडगया। अमेरिकियों कें अवचेतन में यह “बम” छिपा हुआ है अन्यथा कोई सिपाही सोते में सत्ताईस निरपराध अफगानिस्तानियों की हत्या नहीं कर सकता है। यह सब असुरत्व है तथा तमस का गहरा प्रभाव है।अमेरिकियों की मूर्खता तथा असम्वेदनशीलता की हद यह है कि टर्की को मारकर कहते हैपी टर्की डे।

राष्ट्रपति बाराक ओबामा ने भी प्रथा के अनुसार चुनाव जीतने के बाद इसको मनाया लेकिन कुछ अलग ठंग से। खबरो के अनुसार दो टर्की पक्षी उन्हे खाने के लिये भेंट मे दिये गये थे लेकिन उन्होने उन्हें न मारने का आदेश दिया। बाराक ओबामा का कहना है था कि ” जीवन चांस का नाम है, सबको जीवन मे एक चांस मिलना ही चाहिये। इस टर्की को भी एक चांस पांने का अधिकार है।” यह तो पता नही कि ओबामा ने सात्विक ठंग से थैंक्स गिविंग डे मनाया या नही लेकिन उन्होने दो टर्की पक्षियों को जीवन दान जरूर दिया है। मानवता किसी राष्ट्रपति से क्रूरता की अपेक्षा नहीं करती है। थैंक्स गिविंग डे प्रेम का पर्व होना चाहिये, सबको मिलजुलकर दुनिया में प्रेम  की लौ जलाना चाहिये। इसे अमेरिकी भारतीय मिठाईयों से मनाने की शुरुआत करें, टर्की को इस दावत से मुक्त कर सत्विक जीवन को अपनाये।  सात्विक जीवन ही विश्व शान्ति का एक मात्र रास्ता है।

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

Categories

%d bloggers like this: