Posted by: Rajesh Shukla | November 2, 2012

ट्वीटर वॉल से गिरफ्तारी और सोशल मीडिया के सवाल


पाण्डिचेरी के एक  व्यापारी एस रवि को उस समय गिरफ्तार कर लिया गया जब उसने पी चिदम्बरम के पुत्र कार्ती चिदम्बरम को भ्रष्ट कहते हुये ट्वीट किया कि “पी चिदम्बरम के पुत्र कार्ती चिदम्बरम ने सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट बढेरा से ज्यादा सम्पत्ति लूटी है।” एस रवि पाण्डिचेरी के पैकेजिंग उद्योग की एक यूनिट चलाते हैं तथा क्षेत्रीय राजनीति में भी सक्रिय है। पैकेजिंग व्यापारी ने बाद में यह भी ट्वीट किया कि उसने एक तमिल के बतौर पी चिदम्बरम को राष्ट्रीय राजनीति में  चुन कर बहुत गलती की है। उसके ट्वीट्स पर कार्ती चिदम्बरम नें एफआईआर लॉच किया था जिसके मद्देनजर पाण्डिचेरी पुलिस नें व्यापारी एस रवि को इन्फार्मेशन और टेक्नॉलाजी एक्ट की धारा 66(`a) के तहत गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने अपनी कार्यवाही पूर्ण कर बाद में उसे सिटी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जहां से उसे बेल दे दी गई। गौरतलब है कि इस तरह के साईबर जुर्म में दो साल तक कारावास तथा दो लाख रूपये तक का जुर्माना शामिल है। सोशल मीडिया पर राजनीति तथा नेट एक्टिविज्म करने वाले लोगो के लिये यह एक कडा सन्देश है।

इस पुलिस कार्यवाही की कल मेनस्ट्रीम मीडिया और सोशल मीडिया में  जमकर आलोचनाये भी हुई है। कई चैनलों नें ट्वीटर हीरो बने एस रवि को भी  कार्यक्रमों में बुलाया। ज्यादातर का यह मानना रहा कि यह ट्वीटर और फेसबुक जैसी सोशल मीडिया वेबसाईट्स के जनतांत्रिक चरित्र पर पुलिसिया पहरा है। टीवी मीडिया ने इस ट्वीटर कथा को अपनी  स्टोरी बना कर एस रवि का जनतंत्र के बारे में दार्शनिक विचार भी जाने । अश्चर्य यह लगा कि मीडिया का बुद्धिजीवी वर्ग उसे हीरो बनाने की कोशिस में लगा था जिसे कानून की नजर में गुनहगार मान कर गिरफ्यातार किया गया था। हम अपनी व्यक्तिगत अवधारणाओं के सामने अपने कानून को भी धता बताने से नहीं हिचक रहे हैं।  ऐसा लगता है कि मीडिया के लोग अंबेडकर की ऐसी तैसी करने में लगे हैं। कल सोशल मीडिया पर तो एस रवि को हिरो बनाने की मानो होड ही चल रही थी, हर छुटभैय्या ट्वीटरवाला उसका लिंक पेश कर रहा था और सुझाव दे रहा था कि हिरो को सभी दोस्त फ़ालो करो।  कार्टूनिस्ट तेलंग जैसे लोग भी उसको हिरो बनाने में लगे हुये थे। आप ट्वीटर पर गरियाईये और गिरफ्तार होईये तो हिरो बन जाईये। तैलंग ने यह नहीं सोचा कि वह व्यापारी एक लोकल राजनैतिक हित से भी प्रेरित हो सकता है, हो सकता है उसके अपने निहित स्वार्थ पूरा न हो सकने के कारण वह फ्रस्ट्रेशन में ट्वीटर पर गाली दे रहा हो, ऐसा कुछ  भी हो सकता है।  कुछ ऐसा ही नासमझ ट्वीटिंग नरेन्द्र मोदी के कमेन्ट पर शुरू हुआ था। किस तरह आरएसएस हिन्दुत्वा बास्टर्ड को सेक्सिस्ट तथा स्त्री विद्वेषी करार दें सकें, इसकी ही मानो होड होने लगी थी। आरएसएस का या बीजेपी का होने का सीधा मतलब है सेक्सिस्ट और स्त्री स्वच्छन्दता का विरोधी। जिसका चित्त क्रिमिनालाईज्ड हो गया हो उसे सच नहीं दिखता है।

संविधान और कानून को धता बताने वाले ये असमाजिक तत्व  इस बात को नहीं समझते कि इसी के दायरे में इसकी तमाम विकृतियों के बाद भी वे अब तक सबसे सुरक्षित है। ये दुष्ट लोग कैसा जनतंत्र चाहते है? नियम, कानून, नैतिकता तथा समाज विरहित जनतंत्र ! जिस बुर्जुआ जनतंत्र में हम हैं उसका स्वरूप हर काल में ऐसा ही था और ऐसा ही रहेगा। भारतीय जनतंत्र एक समंती-बुर्जुआ जनतंत्र है इसका अपना मौलिक स्वरूप है। इसे न तो अमेरिका बनाया जा सकता है और न ही यह अमेरीका बनने के मूड में है।
ट्वीटर मीडिया का सबसे बडा खतरा यही है कि यहां क्रिमनालाईज्ड व्यक्ति बेहतर ठंग से आर्गनाईज्ड हो रहे हैं और उनके आर्गनाईज्ड प्रोपागाण्डा को मीडिया तरजीह ही नही दे रही है बल्कि प्रमुख राजनैतिक-सामाजिक आवाज के बतौर भी रखने से नहीं चूक रही है। यह खतरा बहुत बडा है जिससे निःसन्देह भारतीय कानून द्वारा निपटा जाना चाहिये। सिस्टम की आलोचना जरूरी है लेकिन आत्महनन नही। राजनैतिक विमर्श में व्यक्तिगत होना गलत है, एक इसकी सीमा है। एक दूसरी बात यह भी है कि राजनैतिक आक्षेपो का जबाब राजनैतिक भाषा में दिया जाना चाहिये न कि कानूनी भाषा में। हर बात में कानून की धमकी देकर लोगो की जुबान को बन्द करने की कोशिस एक फासिस्ट कोशिस है। कांग्रेस पार्टी का फासिस्ट चरित्र दिन प्रति दिन उजागर होता जा रहा है। कल सुब्रह्मण्यम स्वामी के आक्षेपो पर राहुल गाधी ने राजनैतिक जबाब न देकर कोर्ट में घसीटने की धमकी दे डाली थी। यह कांग्रेस के नवयुवक को शोभा नहीं देता। स्वामी ने भी ठीक से जबाब दिया ” नोटिस तो भेजे राहुल मेरे पास, सीधे कूडे मे जायेगा।” सोशल मीडिया साईट्स जैसे ट्वीटर पर एक आर्गेनाईज्ड प्रोपागान्डा भी होता है इसलिये इसके बारे में सतर्कता बरतने की जरूरत है।

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