Posted by: Rajesh Shukla | October 20, 2012

विवेकानन्द उवाच्


ऐसी ही कुछ अभिव्यक्तियों पर मैं कई दिन से सोच रहा हूं। इस पर एक ब्लाग पोस्ट लिखने के लिये थोडा और वक्त लूंगा। तब तक आप इसको देखिये।

यूरोप के संस्मरण से-
बाधा जितनी होगी उतना ही अच्छा है। बाधा बिना पाये क्या कभी नदी का वेग बढता है? जो वस्तु जितनी नयी होगी जितनी अच्छी होगी वह वस्तु पहले पहल उतनी ही बाधा पायेगी। बाधा ही तो सिद्धि का पूर्व लक्षण है। जहां बाधा नहीं वहां सिद्धि नहीं है।

फ्रांसिसी भाषा सभ्यता की भाषा है। पश्चिमी संसार के भद्र पुरूषों का चिन्ह स्वरूप। इसलिये ये अंग्रेजी नही सीखते और न इन्हें इसके लिये समय है।

पश्चिम के सभी अच्छे कवि वेदान्ती है। दार्शनिक तत्व लिखने चले कि घूमफिर कर वेदान्त। हां लेकिन स्वीकार करने से डरते हैं। अपनी मौलिकता बनाये रखना चाहते है।
हम लोग यन्त्र हो गये हैं—जान निकल गई है, सिर्फ डोलते हैं यंत्र की तरह॑! यन्त्र ना नही कहता और हां भी नही कहता,उसके पास दिमाग नही होता । येनास्य पितरो याताः –बाप दादे जिस तरफ होकर गये,चला जाता है इसके बाद सड कर मर जाता है— कालस्य कुटिला गतिः सब एक पोशाक, एक ही भोजन, एक तरह की बातचीत सब यन्त्रवत –इसके बाद सड कर मर जाना।

यूरोप मे केवल जर्मन, फ्रेन्च तथा अंग्रेज सभ्य है। बाकी यूरोपीय बहुत असभ्य शायद एशिया में कोई देश इतना असभ्य नही होगा। सर्विया तथा बुल्गारिया तो सूअरों का देश है आवश्य ही दो दिन बाद रूस के पेट में जायेगा।

वार्ता और संलाप में
प्रश्न – क्या हम गरीब मांस खा सकते है?
स्वामी जी- क्यो नही? थोडा थोडा तो खा ही सकते हैं। दिन भर में एक पाव पर्याप्त है। हमें ध्यान रखना चाहिये आलस्य न आये जो गुलामी की जड है।
प्रश्न – आपने अ-ब्राह्मणो को प्रणव का अधिकार कैसे दिया महाराज?
विवेका नन्द – मेरे सब शिष्य ब्राह्मण हैं। मै स्वीकार करता हूँ कि अ-ब्राह्णमणों को प्रणव का अधिकार नही है।
भारत में एक बार  स्त्री गिरती है तो वह सदा के लिये पतित हो जाती है समाज वहिष्कृत हो जाती है। अपने वच्चे के साथ। यह भयावह लगता है लेकिन इससे समाज शुद्ध रहता है।

ऐसे बीस से ज्यादा उवाच हैं जिन पर एक ब्लाग पोस्ट लिखने की योजना बना रहा हूँ। महात्मा के मस्तिष्क में झांकने की कोशिस रहेगी।

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

Categories

%d bloggers like this: