Posted by: Rajesh Shukla | October 5, 2012

डिजिटलीकरण: मीडिया और मनोरंजन का नया भविष्य


देश के चार महानगरों में डिजिटलीकरण की प्रक्रिया इस अक्टूबर 31 तारीख तक पूरी कर लेने की बचनबद्धता को सूचना और प्रसारण मंत्रायल नें पुनः दुहराया है। मंत्रालय के अनुसार 70 प्रतिशत से अधिक डिजिटलीकरण किया जा चुका है जिसमें कमोवेश 14.76 लाख सेट टॉप बाक्स लगाये जा चुके हैं। सरकार इसके लिये कटिबद्ध है। जनता में डिजिटलीकरण के बारे में जागरूकता लाने के लिये सरकार द्वारा इसके विज्ञापनों पर काफी खर्च किया जा रहा है। लेकिन जनता को शायद इसके बारे कुछ पता है कि डिजिटलीकरण का मतलब क्या है?

सेट टॉप बाक्स लगाने के क्या फायदे हैं और यदि उपभोक्ता को कोई घाटा है तो क्या है। सरकारी विज्ञापनो में यह सन्देश आ रहा है कि जल्दी टॉप सेट बॉक्स लगवा लें अन्यथा आप टीवी के कार्यक्रम नहीं देख पायेगें। केबल की सेवायें लेने वाले उपभोक्ताओं के लिये यह कमोवेश कुछ भयभीत करने वाला, कोई नई मुसीबत जैसी बात लग रही है। इस तरह के विज्ञापनों से इतर सरकार को ऐसे विज्ञापन बनवाने चाहिये थे जो यह बतलाता कि इसके कितने फायदे है। कम पढे लिखी जनता में डिजिटलीकरण से एक तरह का भ्रम सा फैल रहा है। डिजिटलीकरण से पूर्व केबल द्वारा उपभोक्ता को 100 रूपये में कमसे कम सौ से अधिक चैनल मिलते थे जिसे ट्राई नें डिजिटलीकरण के बाद भी एक निर्देश द्वारा अनिवार्य बनाया है। डिजिटलीकरण के बाद भी कमसे कम चैनलो की दर मे बढोत्तरी नही होगी, गरीब टीवी के उपभोक्तता जो ऊची कीमतो पर पैकेज नहीं खरीदना चाहते उनको भयभीत होने की जरूरत नही है। जिनके पास हर माह 250 रूपये तक खर्च करने की क्षमता है उनके लिये डिजिटलीकरण लाभप्रद है, वे मनचाहा पैकेज खरीद कर मनचाहे चैनल देख सकते है। केबल टीवी द्वारा सौ रूपये में दिये जाने वाले चैनल बहुत कम है, इसमें उपभोक्ता को कोई च्वाईस नहीं रहती, जो आ रहा है उसी से सन्तुष्ट होना रहता है।

पुरा आलेख विष्फोट पर पढे

दोस्तों इस डिजिटलीकरण पर मुझे यह सवाल पूछना है–

१-डिजिटलीकरण की रफ्तार को तेजकरने के लिये जनता के सिर RS-3000 का बोझ कांग्रेस ने क्यों लादा?

२- जब जनता सौ से अधिक चैनल 100 रूपये में देख रही थी सरकार ने उन पर कमसे कम 180 रूपये की बाध्यता क्यो की”

३- अधाधुंध जनता को डरवाकर सेट टांप बांक्स लगवाने मे किसका फायदा हुआ? यदि तीन प्रमुख टाप सेट बाक्स बनाने वाली कम्पनियों का नही? कांग्रेस ने इसमे कितना मुनाफा कमाया?

जनता का यही वास्तविक  मुद्दा है । यह तो एक तरह की मार्केटिंग वाली लूट है– कांग्रेस ने तीन प्रमुख विदेशी कम्पनियों  के प्राडक्ट बलपूर्वक जनता के घर मे  लगवाकर  अरबो कमाये होंगे। कांग्रेस ने  विदेशी कम्पनियों का एजेन्ट बन कर काम किया है और कमाई तीन तरफा की है। एक तरफ सेट टाँप बनाने वाली  कम्पनियों ह्यूमैक्स, स्काईवर्थ और केओन से, दूसरी तरफ मल्टी सिस्टम आपरेटर्स(एमओएस) से तथा तीसरी तरफ चैनलों से भीयह घोटाला अरबो का होगा। 

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