Posted by: Rajesh Shukla | October 2, 2012

तो क्या पुरानी पत्नी आम की गुठली भी नहीं


एक कवि सम्मेलन में पिछले 30 तारीख को श्रीप्रकाश जायसवाल ने जो भी कहा वह बेहद बेहूदा और हमारी पवित्र पत्नियों को एक बडी गाली से कम नही था, उनके  आस्तित्व का घोर अपना कहिये। क्या कहा कोयला घोटाले के एक महत्वपूर्ण सूत्रधार ने , ‘नई-नई जीत और नई-नई शादी. इसका अपना महत्त्व होता है, जैसे-जैसे समय बीतेगा. जीत पुरानी होती जाएगी. जैसे-जैसे समय बीतता है पत्नी पुरानी होती चली जाती है. वो मजा नहीं रहता है.’ वह तो आम की गुठली से भी बदतर हुई । क्या जयसवाल की पत्नी माया रानी ने सुना? यह उनका सबसे बडा अपमान है। उन्हें जूता चप्पल लेकर जयसवाल का स्वागत करना चाहिये।

कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल के इस बयान पर बवाल कम मचा क्योंकि मीडिया बचती नजर बचाती नजर आई। यही बात यदि भाजपा के किसी नेता ने कही होती तो वह बहुत बडा फासिस्ट होता और सप्ताह भर खबर चलती रहती। बीजेपी समेत तमाम सामाजिक संगठनों ने महिलाओं पर दिए गए इस अभद्र बयान की कड़ी निंदा की है लेफ्ट नें इस्तिफा मागा है। जायसवाल ने अपने बयान पर माफी मांगी माफी जरूर मांगी है लेकिन वह अपर्याप्त है। जयसवाल सबकी पत्नियों  के अपराधी है। उनके अनुसार पत्नियां शादी के कुछ दिनो बाद खराब  हो जाती है और उनमे रस नही रहता तो क्या परिवार में पत्नियां मात्र बेकार माल हैं। क्या रस लेने जयसवाल रण्डियों के पास जाते हैं?

जायसवाल ने दो दिन पहले 30 सितंबर को यह बात  जन्मदिन के मौके पर कही थी और चूंकी कोयला घोटाले में लूटकर मालामाल है तो रण्डियां याद आ रही है नही तो इसके इतर किस स्त्री की बात जयसवाल कर रहे थे? लोगो की बहनो और बेटियों की जवानी के रस के बारे में? पत्नी पुरानी होते ही कचरा माल हो जाती है इसलिये निगाह नयी माल पर है। कांग्रेस के नेताओं की इस मानसिकता ने ही दिल्ली में 7 लाख से अधिक वेष्याओ को पैदा  किया है। कांग्रेसियों की पत्नियां बेकार माल हो गई है इसलिये ये अन्यों की लडकियो को खराब कर रहे है।

भारत मे पत्नी का स्थान सबसे उपर है, वह जीवन का आधार है। यह बात जयसवाल को नही पता क्योकि उनके अंग्रेजों के कांग्रेसी संस्कार हैं।  हमारे सामाजिक पारिवारिक जीवन को तहस नहस करने की  कांग्रेस की यही मूलभूर रूप से रण्डियाना संस्कृति है।  कांग्रेस इस संस्कृति को प्रचारित भी करती है जिसमें रण्डियां शीर्ष स्थान ग्रहण करती हैं। यही पर पता चलता है कि  कांग्रेस पर मूलतः  पाश्चात्य वेष्या संस्कृति का प्रभाव है । यदि एक शब्द में  कहें तो हरमवादी हैं कांग्रेसी।  और दूसरी तरफ यही एक वजह भी है कि उन्हें सीता प्रिय नहीं है और न ही राम प्रिय है ।  ये घोर विरोधी रहे हैं और हर  तरह से सांस्कृतिक रिप्रेजेन्टेशन में भी उन्हें  दूषित करने की  कोशिस की है।  कांग्रेस पत्नी प्रथा  को खत्म कर भारत में वेष्याजीवन पद्धति शुरू  करनें की कोशिस करती रही है।

कांग्रेस परिवार के ज्यादातर नेता परिवार विरोधी रहे है, पत्नियों से बेहतर उन्हे सदैव रण्डियां  या बाहरी औरते लगती रही है  भले ही  वे उसे प्रेम प्रसंग कहते रहें हों।  नारायण दत्त तिवारी वाला प्रसंग कोई अपवाद नही है, उन्हें अवैध औरते या रण्डियां ही कहिये।  इन सबकी रही है और हैं।  जयसवाल वास्तव में नित नई रण्डियों  में रस की ही वकालत कर थे  और लगता है उसीको पारिवारिक जीवन से श्रेष्ठ मानते हैं। इस देश को यदि रण्डिखाने में तब्दील होने से बचाना है तो पत्नियां सडक पर आयें और जयसवाल को सबक सिखाये।

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

Categories

%d bloggers like this: