Posted by: Rajesh Shukla | May 14, 2012

भगवान के लिये ऐसा मत कहिये!


हेनरिक हेन ने अपने कन्फेशन मे हेगेल के बारे में यह बहुत सुन्दर प्रसंग लिखा है-
‘जब मै एक बीस साल का नवयुवक था तब एक तारो भरी दुधिया चांदनी रात में जब कमोवेश मै खुब छक कर खा पी चुका था और काफी पीते हुये अपनी बालकनी पर पहूँचा तो तारो को घूरते हुये अपने गुरू हीगेल से मैने पूछा,
“ गुरूदेव! ये तारे क्या दैवी नहीं हैं, ईश्वर का सन्देश नहीं है। क्या ये प्रभु का मार्ग नहीं है’
हीगेल ने कहा “लो! मुझे तो तारे स्वर्ग में कोढ की तरह दिखते हैं”
मैं चिल्लाया, “ भगवान के लिये ऐसा मत कहिये! क्या वहां एक खुशहाली भरा संसार नहीं है? क्या हर आत्मा के लिये वहां  बाईबिल नें एक जगह सुरक्षित नहीं की है, जहां आत्माओ को उनके अच्छे कर्मो का फल मिलता है?”

हीगेल ने कहा “ तो तुम अपने भाई को जहर न दे सकने के कारण कोई नई दैवी तरकीब खोज रहे हो या अपनी बिमार मां के लिये कोई धार्मिक उपाय?

“ इन सूदूर स्थित तारो को
हमे एकटक घूरने का
क्या अधिकार है..”
—-गोथे

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