Posted by: Rajesh Shukla | October 1, 2010

Private museum an oppresive regime


Francisco José de Goya y Lucientes, Plate 39 from The Disasters of War

There is no political power without control of the Memory. Museums control memory . Private museums are one of the oppressive regime, it is against secular culture and anti-humanism.


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Responses

  1. now I am thinking about multitudes 🙂 You are a great sir, thanks for enlightening us of these bourgeois conspiracies against masses.

  2. मैं दलित संस्कृति के विलोपन के बारे मे सोच रही हूँ तथा साथ साथ अन्य वर्गो की संस्कृति के बारे मे भी। मायावती तथा मुसलमानो को आगाह करो।

  3. सर यह एक बहुत बडी साजिश है भारतीय मध्य वर्ग के खिलाफ तथा दलितो के भी । ये लोग कला इत्यादि को टाटा बिडला की व्यक्तिगत प्रापर्टी बना दिये है। धन्यवाद इस पोस्ट के लिये।

  4. आप इस तरह के म्यूजियम की बात कर रहे हैं शायद ! मैने सर्च किया तो एक यह मिला http://www.bdlmuseum.org/ इनका इन्हेरिटेन्स है। ये उपनिवेशवादियो से ही उनकी सेवा मे लगे हुये एक वर्ग तक यह पहूँचा। बिल्टिंग मे जो कुछ संग्रहित भारती कला रही होगी वो तो लंदन ले गये होंगे और बेच डाले होंगे। पहले ब्रिटिश उपनिवेशवादियो की प्रापर्टी थी यह अब भारतीय किसी की सम्पत्ति है। भाऊ दाजी नामक किसी ने हथिला ली और उनकी तर्ज पर आर्टीफेक्ट का संग्रहालय बना डाला । इसे धीरे धीरे आक्शन में समय समय पर बेचेंगे कला के नाम पर, पुराने के नाम पर। उपनिवेशवादियो की सेवा मे लगे वर्ग ने उनके ठर्रे को अपना लिया जैसे यह है।


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