Posted by: Rajesh Shukla | September 13, 2010

गुरूजी का मुंडा


चलो यह तो कहा जायेगा कि अन्त में जैसे भी हो भाजपा ने झारखंड मे अपनी सत्ता सम्भाल ही ली और मुंडा एक बार फिर से मुख्यमंत्री बन गये हैं। अंर्जुन मुंडा छुपा अर्जुन निकले, गुरू जी नाक रगडते रह गये कि चाहे हो जाय गद्दी तो हमारा पुत्र ही सम्भालेगा लेकिन हुआ उल्टा-इसमें कांग्रेस को ही धन्यवाद दिजिये। जो नौटकी गुरूजी ने की थी उसे सबने देखा था-सरकार बन रही है, नही बन रही, बन रही है: नहीं बन रही है में ही महीने भर से ज्यादा दोनों पार्टियाँ अंटकी रही। काँग्रेस झामुमो के गुरूजी की नस नस जानती है तो उसने नौटंकी जारी रहने दिया तब तक जब तक गुरू जी ने भाजपा की भद्द नहीं पीट दी। राष्ट्रपति शासन लगना अन्तिम विकल्प बचा था। यह सब गुरू जी के कारण हुआ लेकिन अन्ततः उन्हे यह बात संमझ आ गई कि काँग्रेस चारा नही डालेगी और राष्ट्रपति शासन से तो बेहतर है कि जो मिले उसी के साथ शासन मे बने रहो, तो अन्तः सरकार बन गई।

भाजपा का अपना मामला है वह जानती है कि एक बार सरकार बन जाय, चीजे चलने लगे तो ठीक से गुरू जी को बताया जायेगा बल्कि झामुमो को निगल लिया जायेगा जिसकी शुरूआत हो चुकी है। वैसे गुरू जी से इतर बेटे की राजनीति है, भाजपा से मिलकर ही राजनीति करना चाहता है बल्कि उसे भाजपाई बन जाने मे भी कोई परहेज नहीं है। अर्जुन मुंडा के साथ उपमुख्यमंत्री बने हेमंत सोरेन नागपुर जाकर गडकरी से मिले फिर राँची मे संघ प्रमुख की चरण धूलि लेने भी गये। उस चरण धूलि के बगैर कुछ नहीं हो सकता मुंडा को पता है लेकिन क्या हेमंत शोरेन को भी यह पता है? झाखण्ड राजनैतिक रूप से सबसे अस्थिर राज्य के रूप मे सामने आया है रिकार्ड है उसका, दस वर्ष मे आठ मुख्यमंत्री बन चुके है । यह वहाँ के लोकल दलो की राजनीति के कारण है। गुरूजी के दाँव पेचों तथा पद पर बने रहने की लालसा के कारण ही वहाँ सरकारे सदैव संकट में रही हैं तथा सबसे अस्थिर रहीं हैं। यह नही कहा जा सकता कि अबकी बार भी कोई स्थिर सरकार होगी गुरूजी किसी समय संकट की बिजली सरकार पर गिरा सकते हैं।

अर्जुन मुंडा का रिकार्ड हलाँकि अच्छा ही रहा है देखना है गठबंधन की गाडी को वे कितना लम्बी दूरी तक खींच पाते है। भाजपा मे ही इस सरकार के बने रहने पर संदेह है बहुत से नेता इससे सहमत नही है, कहा जा रहा है कि आडवानी ही इस गंठबन्धन के खिलाफ थे और गडकरी के निर्णय से नाराज भी। शपथ समारोह मे भाजपा के कई बडे नेताओ की अनुपस्थिति रही। अर्जुन मुंडा काफी पाजिटिव है मुंडा ने कहा कि मेरी सबसे बड़ी प्राथमिकताएं राज्य में भीषण सूखे से निपटना और किसानों और गरीबों का दुख दूर करना होंगी। गठबंधन एक पारदर्शी शासन व्यवस्था देगी और राज्य को फिर से विकास के पथ पर लाया जाएगा। देखिये यह सब कुछ एक आध महीनो मे साफ हो जायेगा। यदि हेमंत महतो गुरूजी को डाँट डपट कर घर बैठा पाये तो सरकार चल सकती है।

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