Posted by: Rajesh Shukla | September 11, 2010

तो क्या सचमुच लालू जोकर है


लालू प्रसाद यादव बीस वर्ष बिहार के नेता रहे लेकिन बिहार को उन्होने जम कर खाया और पचाया। पशुओ का सारा चारा लालू-रावणी सपरिवार पचा गये। लालू का प्रभामण्डल एक जोकर चरित्र से मिलकर बनता है, एक जोकर जो अपनी जनता को यह कहकर चुप करा देता है को अरे बुरबक यदि गंगा पर पीपे का पुल हटा कर पक्का पुल बन जायेगा तो तुम गाँजे का कारोबार कैसे करोगे? पक्के का पुल कार वालो के लिये होता है गरीबो के लिये नहीं!! लेकिन बीस साल बाद ही सही बिहार की जनता को होश आया उसने लालू से गद्दी छीन ली। अब लालू हर तरह की जोकरई के लिये आजाद हैं। यह खबर है कि मुख्यमंत्री नीतीश ने लालू को अंधविश्वासी कहा है। नीतीश ने कहा है कि जनता का विश्वास खो देने के बाद लालू  ने अधविश्वास की शरण ली है अन्यथा छठ पर सूरज को देख कर बिस्कूट खाने की बात वे नहीं करते। उन्होने तो यहाँ तक चुटकी ले डाली की लालू जवान दिखने के लिये सफेद बाल रंगने लगे हैं।

यह चुटकी लालू को अच्छी नही लगी उन्होने चेतावनी दे डाली कि “हमें नीतीश कुमार का हर राज पता है लेकिन हम उसे सार्वजनिक नहीं करेंगे. नीतीश भी डेंटिंग और पेंटिंग करते रहे हैं. लोगों को उनका असली चेहरा जल्द दिख जाएगा और जनता उन्हें करारा जवाब देगी.” राज को राज रहने दो लालू जी क्योकि आपके राज खोलने पर भी बिहार की जनता अब आपकी बातों से राजी नही होने वाली। नीतीश के राज से बिहार की जनता बहुत खुश है लोगो ने पहली बार थोडी बहुत विकास की आशा पाई है। भारतीय जनतंत्र ही एक मात्र ऐसा जनतंत्र है जहाँ जाति के नाम पर आप जनता को मूर्ख बना सकते हैं। तमाम नेता सिर्फ जनता को मूर्ख ही बना रहे हैं चाहे वे मुलायम सिंह हो, लालू हो , पासवान हों या मायावती हों। उन जातियो का जो उद्धार अभी तक दिखता है जितना दिखता है वह सब काँग्रेस की ही देन है। फिर एक बार कहा जा सकता है कि कई बार जनता चुनाव ठीक नहीं करती हलाँकि हमने यह परम्परा बना ली है कि जनता का चुनाव सर माथे पर। जनता के चुनाव पर कोई  प्रश्न चिन्ह नही है?  जनता ही तो महाराष्ट्र में फासिस्टों को चुनती है! यह जनता ही है जिसनें नाजीयों को चालिस लाख लोगों को कत्ल करनें के लिये बहुमत दिया। लेकिन यह सोचने की बात है कि जनता क्यों उन्हें चुनती है जो उसके लिये काम नही करता, जो अमानवीय मूल्यों की पराकाष्ठा है? जातिवाद क्या इतनी प्रबल चीज है जो व्यक्ति की बुद्धि को कुंद कर देती है यदि नहीं तो लालू बीस साल तक बिहार को न लूटते रहते और मायावती इस तरह से उत्तरप्रदेश को खोखला नही बनाती रहती। जातिवादी माहौल और सोच को जनजागरण से खत्म किया जा सकता है तथा इसमे मीडिया बहुत कुछ कर सकती है लेकिन मीडिया करना नहीं चाहती।

यहाँ लालू की बात हो रही थी तो क्या सचमुच लालू जोकर ही है? सवाल की छानबीन करने पर पता चलता है कि यह वह फिल्मी जोकर है जो लूट, डाँका और खून जैसी वारदातों को अंजाम दिलवाता रहा है। लालू ने यदि बीस वर्ष राज किया तो बिहार के अण्डरवर्ल्ड तथा चोरो और लूटेरों का सरगना बन कर। ऐविल तत्वों को जम कर प्रोत्साहित किया था लालू ने-एक दौर था जब अन्य राज्यो से जाने वाले ट्र्क डर डर कर बिहार मे घुसते थे क्योंकि ट्र्क लूट लिया जाता था उसका अता पता भी नहीं चलता था। नीतीश ने इतना तो किया कि वे चोर लूटेरे अब नही दिखते, जनता के मन से उनका भय कमोवेश चला गया है। यह पाँच साल में नीतिश की सरकार की बडी उपलब्धि है। नीतीश लालू की तरह जोकरई नहीं करते वे काम भी करते हैं। इस सबके बीच यह सवाल मुझे बार बार परेशान करता है कि बीस सालो के लालू राज में उसकी लूट, डकैती और अपहरण के बाद भी हिन्दी मीडिया उसे महान नेता के रूप में प्रस्तुत करती रही है- उसके विचार जाने बगैर कोई बात सम्भव नही हुआ करती थी। आलोचना! छोडिये साहब, यह मुमकिन कहाँ है जब कोई सत्ता में लूट का हिस्सेदार हो ! क्या लालू की लूट में मीडिया साझीदार नहीं रही थी? यदि नही रही तो बीस सालों तक उसकी लूट को जनता के सामने क्यों नही रखा? यह सिर्फ लालू का मामला नही है यह प्रश्न  अन्य नेताओ के बावत भी है।  जोकरों तथा चोरों को मीडिया जिस तरह से जगह देती है, जिस तरह से उनको प्रसिद्ध करती है और डिशकशन मे बुलवाती है वह चिन्ता का विषय है। यदि कुछ और नहीं तो चोर लूटेरे ईन्टरटेनमेंन्ट का हिस्सा बन जाते हैं। यह किसी भी क्षेत्र के बारे मे सच है चाहे वह वालीवुड ही क्यों न हो। शुभ के पीछे अशुभ का अनवरत खेल जारी रहता है जिसके बीच बडी सुन्दरता से तारतम्य बनाये रखा जाता है। चलिये लेकिन एक नेता ने एक खतरनाक जोकर  की कब्र खोदी तो सही!

–राजेश

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Responses

  1. hello! रावडी को रावणी पढें या रावडी!! ;-))))))))))))))))))))))))

    • सुम, वस्तुतः वह रावणी ही लिखा गया है 🙂


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