Posted by: Rajesh Shukla | August 22, 2010

छिनाल प्रकरण का पटाक्षेप


यदि मैत्रेयी पुष्पा विख्यात लेखकों जैसे राजेद्र यादव इत्यादि का बिस्तर गरम कर लेखिका बन गई जैसा कि लोक में प्रसिद्ध है तो इसमें हरज क्या है। पेटीबुर्जुआ पूँजीवादी बिमर्श के हिसाब से  यह तो स्त्री विमर्श ही है। देह बहुत गहरे पूँजीवादी समाज में स्त्री की सफलता का अस्त्र माना जाता है, सारी बुर्जुआ फेमिनिस्ट इस तर्क को प्रश्रय देती हैं। अब मेरे खयाल में जैसा कि अक्सर होता रहा है, इस छिनाल प्रकरण को उपान्यास का रूप देने की और एक फिल्म बना देनेकी जरूरत है। बुर्जुआ पटाक्षेप ! रामगोपाल वर्मा को , मधुर भण्डारकर को काँल करो:-)

–निवेदक राजेश शुक्ला

Advertisements

Responses

  1. सर दोनो को पकडकर शादी करादो 😉

  2. सर यह तो गजब हो गया छिनाल प्रकरण मे ज्यादा वही बढचढकर भाग ले रहे है जो दक्षिण पंथी है मसलन गिरिराजकिशोर, राजकिशोर इत्यादि । वास्तव मे यह दक्षिणपंथियों का मामला है। जनसत्ता ही दक्षिणपंथी रूख मे रंगा है हाँ क्यो नही इसमे प्रगतिवादी भी हो सकता कई सियार हैं जो रंगे हुये बिचर रहे हैं।


Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

Categories

%d bloggers like this: