Posted by: Rajesh Shukla | July 28, 2010

अखिलेश की किताब “अचम्भे का रोना”


आज का दिन बहुत अच्छा रहा। मुझे अखिलेश की लिखी चार किताबें प्राप्त हुई, किताबें दिल को बाग बाग कर देती है। मुझे तो ये हीरा से भी कीमती लगती है, किताबें अनमोल है। अखिलेश से बात करना तो आनन्द देता ही है लेकिन किताबे भी उसी तरह का आनन्द देंगी यह नहीं सोचा था। किताबें मिलते ही उन्हें सरसरी दृष्टि से पलट गया और जिस किताब ने सबसे ज्यादा आकृष्ट किया वह थी “अचम्भे का रोना”, यह किताब कुछ उनके प्रिय कलाकारों पर उनकी टिप्पणीयों का संयोजन है। अम्बादास, रजा, प्रभाकर वर्वे, मनीषपुष्कले, रामकुमार, रजा, हुसैन, नागजी पटेल इत्यादि कलाकारों की कला को उन्होनें एक कलाकार की नजर से देखा है। सारे पन्ने भावनात्मक शब्दों की लडियों सें भरे हुये है, जिस तरह अखिलेश भावनात्मक प्रवाह में बातचीत करते है उसी तरह लिखते भी हैं। मैंनें निर्णय लिया कि पहलें इसे पढने का सुख पाया जाय और धडाधड कुछ पन्ने इसके पढ गया हूँ और इसे ही पढ रहा हूँ। शेष तीन किताबें भी अच्छी है जिसमें मार्कशागाल की “आप-बीती” जो चित्रकार शागाल की डायरी का अनुवाद है, “मकबूल” टाईटल से किताब मकबूल फिदा हुसैन की एक संक्षिप्त जीवनी है और “अखिलेश एक संवाद” एक बहुत लम्बी बातचीत को किताब का रूप दिया गया है। बातचीत पीयूष दईया ने की है। संवाद का एक बडा अंश मेरा पढा हुआ है इसलिये इसे बाद में पूरा पढूँगा। कुछ दिनों बाद इनका एक रिव्यू भी आपको मेरे ब्लाग पर पढने को मिल सकता है। अखिलेश को किताबे भेजने के लिये बहुत बहुत धन्यवाद ।

–राजेश शुक्ला

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Responses

  1. कवर से तो किताब बहुत आकर्षक लग रही है. आपकी टिप्पणी पढ़ने का इन्तेज़ार रहेगा.


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