Posted by: Rajesh Shukla | July 9, 2010

किस तरह साई बाबा हिन्दुओं के भगवान बन गये


सत्य से ही चेतना का परम विस्तार होता है–माण्डूक्य

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हिन्दुओं ने विगत पाँच शताब्दियों से कुछ भी नया नही किया हाँ उन्होने दूसरे सम्प्रदायों के गुरूओं को समाहित करने की कोशिस जरूर की। जिनसे भी उन्हें खतरा लगा उन्हे अपने में समाहित करने की कोशिस की। साई बाबा ईस्लाम के साई परम्परा से आते हैं तथा उसी परम्परा में उन्होने अपनी सिद्धि प्राप्त की थी (हलाँकि कि मुझे शक है क्योकि वह बहुत बडे गँजेडी थे) फिर वे किस तरह विष्णु के अवतार बन गये, यह सोचने की बात है। हमने थोडा सोचा तो पता चला कि अरे यहाँ बात तो ले देके सिर्फ व्यापार तक सिमटती है।  जरा सोचें कि किस तरह ईस्लाम का एक फकीर वैष्णव बनता है?

पहले यह सोचें कि किस तरह ईस्लाम का महात्मा हिन्दू अवतारवाद को ग्रहण कर सकता है और वैष्णव बन सकता है? यह एक धर्मविज्ञान का मामला है जिससे न तो ईस्लाम का गुरू सहमत होगा न ही पक्का वैष्णव जैसे रामानुज इत्यादि की महान तत्वदर्शन की परम्परा वाले । ईस्लाम और हिन्दु धर्म किसी भी छोर पर किसी भी तरह थियोलाँजिकली नहीं मिलते । और सबसे बडी बात – क्योंकर साई बाबा अपनी गुरू परम्परा का अतिक्रमण करेंगे? यह आध्यात्मिक स्तर पर सोचने वाली बात है। हर गुरू अपने शिष्य को अपनी परम्परा में जब दिक्षित करता है तो पहली प्रतिज्ञा यही होती है कि तुम इस परम्परा का निर्वाह करोगे। साई ने क्यों गुरू द्रोह किया? यदि उन्होने गुरू द्रोह किया तो न तो वे हिन्दुओं के हो सकते है, न ईस्लाम के क्योंकि दोनो में गुरू द्रोह जघन्य अपराध माना जाता है। ईस्लामिक सूफी परम्परा में तो गुरू भगवान जैसा माना जाता है, गुरू के बगैर कुछ भी सम्भव नहीं माना जाता, ऐसे में साई क्यों अपनें खुदा का अपमान करेंगें? वास्तव में उन्होने पूरे जीवन भर अपने ठंग से ही अपनी परम्परा में रह कर जीवन यापन किया। यह हम साई मन्दिर में उनके समाधि स्थल तथा उनके द्वारा प्रयुक्त चीजों को देखकर सहज ही अनुमान लगा सकते हैं। साईबाबा मंदिर में अब भी साईं की मजार  है ! samadhi_sai_baba_shirdi

क्या हिन्दू  परम्परा में मजार की पूजा का प्रावधान  है ? नहीं है ! सनातन धर्म में इसे स्वीकार नहीं किया गया है । दूसरी बात,  हिन्दू धर्म में भगवान का अवतार या अवतारी अपनी सनातनी मर्यादा का अतिक्रमण नहीं करता। वह परम्परा में चलता है, वह गुरुकुल जा कर विधि पूर्वक अपनी परम्परा का ज्ञान प्राप्त करता है, विष्णु भगवांन के सारे अवतारों में यह बात देखी  गयी है ! जबकि यह साईं बाबा  एक अनपढ़ पीर जैसा था जो इस्लामिक परम्परा पर चलता था, वैसा ही उसका लिबास और आचार था।  उसे सनातन हिन्दू परम्परा का कोई ज्ञान नहीं था ।  यह बात उन दुष्टों  की समझ में क्यों नहीं  आयी  ?

साई बाबा यदि सच्चा फ़क़ीर रहा होगा  तो उसने कभी  नहीं  कहा होगा कि वह विठोवा का अवतार  है । यह  लालची धर्म व्यापारियों और पण्डो का षडयन्त्र है जिन्होने उन्हें विठोवा का अवतार घोषित किया।  उनके नाम पर धर्म और चमत्कार का व्यापार बेहतर ठंग से किया जा सकता था क्योंकि अब विठोवा न केवल मूर्ति मे थे बल्कि उससे निकलकर अवतार ग्रहण कर चुके थे और लीला कर रहे थे । निश्चय ही वे जिस दौर तथा जिस समाज में रहते थे धर्म का  व्यापार से गहरा नाता  था , धर्म के साथ व्यापार का गहरा नाता आज भी है–आज अकेले शनीचर का ही व्यापार करने वाले कई सौ मिलियन के व्यापारी है। शनी का रत्न १२ हजार से लेकर लाख रूपये तक का मिलता है लेकिन यदि उसे लौटाकर पैसे माँगे जायें तो उसके रिटर्न में एक रूपया भी नहीं मिलता। उसकी सारी दिव्य उर्जा जो आपकी देह मे चली गई बताई जाती है । मुझे आश्चर्य यह है कि अज्ञानी पण्डों को उन्हें विष्णु का अवतार बताते समय लज्जा भी नहीं आई और हिन्दू बनियों को व्यापार के आगे अपना धर्म भी याद नही रहा -सच ही है व्यापार ही सबसे बडा धर्म है!!

वह वैष्णव कहां गया ,वह वैष्णव धर्म कहां गया ?  वह हिन्दू जिसका ईश्वर सदैव वेद और सनातन धर्म की स्थापना के लिये आता है, वह किस लालच में यह सब कर गया होगा ? यह सोचने की बात है। हलाँकि यह सच है कि आज भी जो वैष्णव समाज है विशेषकर रामानुजाचार्य की परम्परा का या गौणिय परम्परा का या निम्बार्क की परम्परा का -वह इस बात का समर्थन नहीं देगा क्योंकि वह इस थियोलाँजिकल विरोधाभाष को जानता है। जिस समाज में वे रह रहे थे उस समाज के अनपढ क्या यह भी सम्भव नहीं  है कि उसकी प्रसिद्धि से विठोवा मंदिर को खतरा हो गया हो इसलिए उसे  जरुरी हो गया हो ? इसलिए चालाक धर्म व्यापारियों उन्हें विठोवा के  नाम पर ही  समाहित कर लिया  ( यानि व्यापार जिसमें किसी मन्दिर की प्रसिद्दि ही महत्वपूर्ण है ) | उनके रहते तो मन्दिर बना नहीं होगा क्योकि वे जिस परम्परा से थे उसमें नमाज पढी जाती है न की घंटा बजाया जाता है। साई बाबा भी नमाज ही पढते थे और आजीवन पढते रहें। तो साई बाबा के रहते तो हिम्मत नहीं हुई होगी कि उनके नाम का ललची  बेजा इस्तेमाल करते लेकिन बाद में बडा आर्गनाईज्ड ठंग से सब कुछ किया गया। किताब लिखी गई, विधिवत पूजा की हिन्दू विधि बनाई गई तथा आरतीयाँ लिखी गई । बाबा ने तो यह सब कभी उपदेश भी नहीं किया होगा क्योकि वे एक निराकार, निर्गुण खुदा के उपासक थे न कि विष्णु के तथा वेद के उपासक। साई बाबा ने अपनी भेषभूषा तक तो उतारा नही वे क्या खाक हिन्दू देवता के गुण गाते। “ला-ईलाह-ईलाअल्लाह” “La-illaha-illa Allah” का नाम जपने वाला किस तरह पौराणिक भगवान के शरण जायेगा?  वस्तुतः सच्चाई यही है कि वे आर्गनाईज्ड धर्म व्यापारियों की भेंट चढ गये। आज उनके नाम पर किया जाने वाला व्यापार करोडो में है और उनके नाम पर किया जा रहा प्रोपागाण्डा बडा सशक्त हो चुका है। वे कापी राईटेड है तथा उनके नाम पर खुलने वाले मन्दिर वैसे ही खुलते हैं जैसे मैकडानल्ड का आउटलेट या मिठाई की दुकान की एक श्रृंखला । उनके मन्दिर बिना उत्पाद के मुनाफा कमाने का सशक्त साधन बन गये है और वे ब्राण्ड ।

धर्म के नाम पर झूठ, प्रोपागाण्डा, षडयन्त्र , व्यापार  खत्म किया जाना चाहिये।

 

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Responses

  1. पढकर अच्छा लगा सच मे यह ब्यापार खत्म होना चाहिये। लेकिन किस तरह यह बहुत अर्गेनाईज्ड ब्यापार है। इसे बल पूर्वक ही खत्म किया जा सकता है। नेहरू जी ठीक आदमी थे इसके लिये।

  2. आपको इस तरह के लेख और लिखने चाहिए. धर्म की जो नयी-नयी प्रवृत्तिया उभर रही हैं उनके ऊपर भी. आप लिखने में समर्थ है. कृपया हमरा मार्गदर्शन कीजिये.

    • जरूर प्रभात जी, समय समय पर लिखता रहूँगा।

  3. मूल लेख कहां है.. विस्तार से लिखिए.. मैं सहमत हूं उक्त तथ्यों से

    • मूल लेख किताब का हिस्सा बन चुका है इसलिये उसे ब्लाग में नही डाला सकता। थोडा वह थियोलाजिकली विस्तार के साथ लिखा गया है जबकि इसमे मूल सार डाल कर पोस्ट किया गया है। समझने वाले के लिये यह पर्याप्त है।

  4. sai baba muslim samuday se the . lekin we fakirr the, aur fakiro ka ek hi dharm hota hai manaw samaj ki sewa, jo unhone ki. unka sandesh bhi sanatan yani ki islam dharm ka sandesh sabka MALIK ek ,shradha aur saburi hi raha. logo ne unke sandesh ko na maankar unko hi bhagwan maan liya.

  5. Sai Baba Kun the & aur kya the e sub to mai janta nahi lekin unke chamtakaro ki kahani har juban par hai .Aapke lek ne ek bar sochnne ko majboor jarur kar diya Kya esa bhee hoth hai ?

  6. abhi mai unke chamtkar ki book ko padh raha hu uske bad hi koi bat kah sakta hu janha tuk mera bichar hai way ik achhe sant the

  7. how can I get that book?. Plz infrm. Hope the book have some logical as well as facts that proovs `Saibaba` was a muslim saint. Plz reply.


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